भारत का ग्रीन अमोनिया मार्ग के माध्यम से ऊर्जा संक्रमण

पाठ्यक्रम:GS3/पर्यावरण 

समाचार में

  • भारत का ऊर्जा संक्रमण तेजी से ग्रीन हाइड्रोजन और उसके व्युत्पन्नों पर केंद्रित हो रहा है, जिसमें ग्रीन अमोनिया एक महत्वपूर्ण मार्ग के रूप में उभर रहा है।

ग्रीन अमोनिया

  • यह ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग करके उत्पादित की जाती है और उर्वरकों, ऊर्जा तथा समुद्री अनुप्रयोगों के लिए एक प्रमुख स्वच्छ ईंधन के रूप में उभर रही है।
  • वैश्विक स्तर पर, यूरोपीय संघ की H2Global पहल और दक्षिण कोरिया की क्लीन हाइड्रोजन पोर्टफोलियो स्टैंडर्ड जैसी खरीद तंत्र बाजार विकास को बढ़ावा दे रहे हैं।
  • भारत की ग्रीन अमोनिया नीलामी, राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत SECI के SIGHT कार्यक्रम के अंतर्गत, अपने पैमाने और प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए विशिष्ट है।

ग्रीन अमोनिया के लाभ

  • उर्वरकों का डीकार्बोनाइजेशन: भारत का उर्वरक क्षेत्र, जो आयातित अमोनिया पर अत्यधिक निर्भर है, ग्रीन अमोनिया अपनाकर उत्सर्जन में उल्लेखनीय कटौती कर सकता है।
  • ऊर्जा भंडारण और परिवहन: अमोनिया को हाइड्रोजन की तुलना में संग्रहीत और परिवहन करना आसान है, जिससे यह एक व्यावहारिक ऊर्जा वाहक बनता है।
  • निर्यात क्षमता: भारत ग्रीन अमोनिया निर्यात का केंद्र बन सकता है, विशेषकर उन देशों के लिए जो स्वच्छ ईंधन की खोज में हैं।
  • औद्योगिक अनुप्रयोग: ग्रीन अमोनिया का उपयोग शिपिंग, विद्युत उत्पादन और रासायनिक उद्योगों में किया जा सकता है।
  • रणनीतिक स्वतंत्रता: जीवाश्म ईंधन आयात पर निर्भरता कम होती है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुदृढ़ होती है।

चुनौतियाँ

  • उच्च लागत: वर्तमान में ग्रीन अमोनिया का उत्पादन पारंपरिक अमोनिया की तुलना में अधिक महंगा है।
  • प्रौद्योगिकी तत्परता: बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रोलाइज़र और अमोनिया संश्लेषण तकनीकों को विकास की आवश्यकता है।
  • बुनियादी ढाँचे की कमी: ग्रीन अमोनिया के भंडारण, परिवहन और वितरण नेटवर्क अभी सीमित हैं।
  • कोयले पर निर्भरता: भारत का विद्युत क्षेत्र अभी भी कोयले पर अत्यधिक निर्भर है, जिससे संक्रमण जटिल होता है।
  • वैश्विक प्रतिस्पर्धा: अन्य देश भी भारी निवेश कर रहे हैं, जिससे भारत को प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए तेजी से विस्तार करना होगा।

सरकार द्वारा उठाए गए कदम

  • ग्रीन हाइड्रोजन संक्रमण हेतु रणनीतिक हस्तक्षेप (SIGHT) कार्यक्रम में ₹17,490 करोड़ का प्रावधान है, जो भारत में ग्रीन हाइड्रोजन को बढ़ावा देता है।
    • यह घरेलू इलेक्ट्रोलाइज़र निर्माण को समर्थन देता है।
    • यह ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन को भी समर्थन देता है।
  • राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन हेतु अमोनिया को एक प्रमुख व्युत्पन्न के रूप में महत्व देता है।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: भारत निवेश और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण आकर्षित करने हेतु वैश्विक साझेदारों के साथ जुड़ रहा है।
  • पायलट परियोजनाएँ: उर्वरक संयंत्रों और शिपिंग में ग्रीन अमोनिया को एकीकृत करने हेतु पहलें परीक्षणाधीन हैं।
  • कार्बन तटस्थता लक्ष्य: भारत का 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन का घोषित लक्ष्य ग्रीन अमोनिया को उसकी ऊर्जा रूपरेखा के केंद्र में रखता है।

निष्कर्ष और आगे की राह

  • भारत की ग्रीन अमोनिया रणनीति उसके ऊर्जा संक्रमण को समर्थन देती है, उर्वरक उत्सर्जन कम करती है, ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करती है और निर्यात अवसर सृजित करती है।
  • भारत की ग्रीन अमोनिया सफलता कम नवीकरणीय ऊर्जा लागत, प्रभावी अनुबंध संरचनाओं, सुदृढ़ लॉजिस्टिक्स और लक्षित प्रोत्साहनों से प्रेरित है।
  • प्रगति बनाए रखने के लिए स्थिर विनियम, एकीकृत नवीकरणीय प्रणालियाँ, मिश्रित वित्त, जोखिम सुरक्षा उपाय और सुदृढ़ सुरक्षा एवं प्रमाणन ढाँचे आवश्यक हैं।
  • सतत समन्वय के साथ भारत स्वच्छ अमोनिया में वैश्विक नेता के रूप में उभर सकता है।
  • इंडिया एनर्जी वीक 2026 में प्रधानमंत्री ने स्वच्छ ऊर्जा में $500 बिलियन के निवेश अवसरों को रेखांकित किया, जिससे भारत को ग्रीन अमोनिया परिदृश्य में वैश्विक नेता के रूप में स्थापित किया जा सके।

स्रोत :TH

 

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